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कोरबा । शहर की यातायात व्यवस्था समय के साथ प्रशासन की सजगता से दिनों दिन बेहतर हो रहीहै।कलेक्टर या हों निगम आयुक्त या हों एस.पी. या हों एस.डी.एम.इस समय कोरबा की व्यवस्था चाक चौबंद है और ट्रैफिक जाम से निपटने,अतिक्रमण हो या बेतरतीब वाहनो की पार्किंग जहां तहां पसरी गंदगी हो या वाहनों की करतब दिखाती रफ्तार ,सब पर चल रहा प्रशासन का चाबुक। पर असहाय बेबस और लाचार है प्रशासन, एनटीपीसी के सामने।एनटीपीसी द्वाराअपने दरवाजे के सामने अपनी शान और खूबसूरती के लिए मुख्य मार्ग तक कर चुका है अतिक्रमण जहां राहगीर चाहे पैदल हो बाइक में या कार सवार चाहे राखड़ से भरी दैत्याकार वाहन की हो रफ्तार जिनका सामना आपस में कब किससे हो जाए, एक दूसरे से बचते बचाते गुत्थमगुत्थी से उलझते सुलझते जब मुकद्दर का सिकंदर चौक पार करता है, रोंगटे खड़े और सांसों में जान वापस होती दिखती है। पलभर पहले मौत हो या दुर्घटना मु के सामने से नाच कर गुजरी है, मंडराती मौत इठलाती बलखाती तांडव नृत्य का दर्शन करा के अभी अभी ही जान जो बख्शी है। चौक पार करते हर राहगीर प्रभु का लाख- लाख शुक्रिया अदा करता है। राहगीर हो वाहन सवार अकेला हो या परिवार बेबसी के बीच एक दूसरे की गलती गिनाते दोष मढ़ते घूरती आंखों से आपस में डरते – डराते चौक पार करते जैसे एनटीपीसी चौक की आम बात है, विवशता है एनटीपीसी का अतिक्रमण है जहां प्रशासन के हाथ भी बंधे नजर आते है कारण भी है अधिकारियों को एनटीपीसी आवास और सुविधाएं भी तो उपलब्ध कराती है, ऐसा नहीं कि इन अधिकारियों के लिए कोई अलग रास्ता है, इन सबसे सामना तो इनका भी रोज होता है। पर “हटाओ क्या करना है का बेपरवाह सुशब्द”से कर्तव्यों की इतिश्री करते वह भी आगे बढ़ जाते हैं। अब समय आ ही गया है प्रशासन को सख्ती और सजगता से त्वरित निरीक्षण कर सख्त कदम और आम नागरिकों को बेहतर यातायात उपलब्ध कराने की अति आवश्यक जरूरत। आकर देखें एनटीपीसी की, मुख्य मार्ग को, छूती सुंदरता , लोगो के लिए काल बनकर खड़ी है, जरूरत है ट्रैफिक सिग्नल और एनटीपीसी का अतिक्रमण हटाना साथ ही साथ मुख्य प्रवेश द्वार का पीछे खिसकाया जाना और भी अपरिहार्य प्रतीत हो रहा है ।एनटीपीसी चौराहा पार करता हर राहगीर परेशान और खौफजदा है। प्रशासन जितनी जल्दी सक्रिय होगी जान किसी की बेमौत नहीं जाएगी।



