
कोरबा,दर्री। हर 15 दिन में 4 बार फूटा,सूत्रों के मुताबिक एक बार तो ठेकेदार ने अपना पोकलेन मशीन को राखड़ डैम से निकालने खुद फोड़ा और फिर तो फूटता ही गया।जिससे एक युवक की मौत भी हो गई।तानाशाह अधिकारी ओझा का बोझा अभी करोड़ों में वहन करेगा सीएसईबी। ये तय है फिर भी नहीं संभलेगा,फूटेगा ही ।राखड़ बांधो का फुट जाना जैसे कोई आम बात है।
गेस्ट हाउस में बैठा अधिकारी हो या रायपुर से पहुंचे तकनीकी जानकार सबको पता है क्या हुआ है,क्या होगा और क्या करना है, लीप पोत कर अपने अपने घर जाना है। उनको भी पता है नीव ही जिसकी कमजोर हो , मरम्मत से क्या खाक होगा। राखड़ बांध झाबु इस समय अपने फुटने और दरकने के लिए जगजाहिर हो चुका है,ये तो होना ही था,भ्रष्ट अधिकारियों ने सिंडिकेट बनाकर सीएसईबी का खजाना जो लूटा है , ओझा ने तो काम की तकनीक और मर्यादा को ताक पर रखकर पेटी में नहीं खोखा नहीं खोखों में सेवानिवृत्ति के पहले सात पुश्तों का समेट कर अपने आलीशान बंगले से जांच की दैनिक प्रगति की टोह ले रहे है। उनके अधीनस्थ रहे कर्मचारी निलंबन का दंश झेल रहे, एम बी अपने सामने बैठा कर भरवाने वाला ओझा सबको बोज के चला गया, अब धन उपभोग कर रहा। रह गए जो कर्मचारी उसकी करनी को भोग रहे हैं। जांच का सामना कर रहे हैं।तानाशाह था ओझा मजाल थी कि वर्मा हो या पटेल,कंवर, साहू हो या राठौर, कर्मचारियों में खौफ था, मनमानी का राजा था ओझा, ठेकेदार और ओझा की जुगलबंदी विभाग में जगजाहिर था, विभाग का वाहन छोड़कर , ठेकेदार के वाहन में बैठकर धन कमाने की तरकीब लगाते सबने देखा है, तुर्रम शाह के बारे में फुसफुसा भी नहीं सकते थे ये खौफ था सिविल विभाग के इस किम जोंग का। जांच की लीपापोती को जहां भी बैठा है, जानकारी जुटा रहा है,नेता नुमा मुखबिर लगा रखा है, इस समाचार का मकशद सिर्फ इतना है असली गुनाह का देवता यदि गुनाह किया है तो जांच का भी सामना करे। कंवर,पटेल जैसे कर्मचारी पक्के टांग दिए जाएंगे और ओ दूर बैठा चैन की नींद सोएगा ।जांच सिमटा हुआ है तब के उनके अधीनस्थों पर, आर्थिक अपराध के सरगना और अभी तो एक मौत हुई है न जाने कितनी जानो का जिम्मेदार के कार्यकाल की एम बी सहित ठेकेदार के साथ मिलकर किए अपराध की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो से कराया जाना चाहिए, डर से कांपने वाले, और जायज नाजायज बातें भी आदेश की तरह उसकी बातों में आने वाले कर्मचारियों को मोहरा न बनाए, रायपुर से यहां तक के अधिकारी इस हादसे के जिम्मेदार है। ओझा का मानसिक बोझा निरीह कर्मचारियों पर मत डालो,जिम्मेदार है तो जिम्मेदारी भी तय करो। जांच चल रही है आरोप भी तो दिखाना होगा और बलि भी तो चढानी होगी। देखना बाकी है कौन मौन साधा कर्मचारी कभी भी फांसी पर टांग दिया जाएगा।
अगले अंक में प्रकाशित होगी तकनीकी विशेषज्ञ की राय के साथ..जानने के लिए बने रहिए न्यूज अग्रदूत के साथ……



