
बिलासपुर। बिलासपुर रेंज में बढ़ते दोषमुक्ति (एक्विटल) मामलों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग ने 29 अप्रैल 2026 को रेंज स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की। यह बैठक आईजी कार्यालय के मीटिंग हॉल में आयोजित हुई, जिसमें विभिन्न जिलों के अभियोजन एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में फरवरी 2026 के दौरान दोषमुक्त हुए मामलों की विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों ने पाया कि कई मामलों में विवेचना के दौरान हुई छोटी-छोटी प्रक्रियात्मक त्रुटियों के कारण अभियोजन पक्ष कमजोर हो जाता है, जिसका सीधा लाभ आरोपियों को मिलता है।
प्रभारी संयुक्त संचालक अभियोजन बिलासपुर आशीष झा ने उन प्रमुख बिंदुओं को रेखांकित किया, जहां जांच में चूक होने से मामलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वहीं आईजी श्री गर्ग ने स्पष्ट निर्देश दिए कि विवेचना का स्तर आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप होना चाहिए और प्रत्येक मामले में साक्ष्य संकलन मजबूत व त्रुटिहीन हो।
उन्होंने कहा कि अपील योग्य मामलों में समय-समय पर न्यायालय में अपील की जाए तथा अभियोग पत्र को जिला अभियोजन अधिकारी की स्वीकृति और वरिष्ठ अधिकारियों के दिशा-निर्देशों के अनुरूप गहन परीक्षण के बाद ही न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए।
बैठक में ई-साक्ष्य के उपयोग और घटनास्थल की वीडियोग्राफी को अनिवार्य रूप से अपनाने पर भी जोर दिया गया। इसके साथ ही एनडीपीएस (नशीले पदार्थों) से जुड़े मामलों में विशेष सतर्कता बरतने और विधि सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि प्रक्रियागत त्रुटियों के कारण आरोपी बच न सकें।
समीक्षा के दौरान बताया गया कि सत्र न्यायालय के 106 तथा अन्य न्यायालयों के 709 मामलों का विश्लेषण किया गया। आईजी श्री गर्ग ने अधिकारियों से अपील की कि वे जांच के दौरान तकनीकी व प्रक्रियात्मक कमियों को दूर करें, जिससे दोषसिद्धि दर में वृद्धि हो सके।
उन्होंने विश्वास जताया कि इस तरह की समीक्षा बैठकों से आने वाले समय में जांच की गुणवत्ता में सुधार होगा और न्याय प्रक्रिया अधिक सशक्त बनेगी।



