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आंगनबाड़ी के माध्यम से शासन की योजनाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करें : कलेक्टर

सुपोषण चौपाल के माध्यम से कुपोषित बच्चों व किशोरी बालिकाओं के पोषण स्तर में सुधार लाने के दिए निर्देश

प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना में अधिक से अधिक हितग्राहियों को लाभान्वित करने के निर्देश

कलेक्टर ने महिला एवं बाल विकास विभाग की बैठक ली, विभागीय कार्यों की गहन समीक्षा की

कोरबा, 05 जनवरी 2026/ कलेक्टर कुणाल दुदावत ने आज जिला सभाकक्ष में महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक ली। इस दौरान उन्होंने विभागीय योजनाओं की प्रगति की विस्तृत जानकारी लेकर उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों में रिक्त पदों पर भर्ती, बाल सम्प्रेषण गृह, मध्यम एवं गंभीर कुपोषित बच्चों हेतु पोषण आहार वितरण, गर्भवती और शिशुवती महिलाओं को टीएचआर का वितरण, रेडी टू ईट सामग्री, आंगनबाड़ी में उपलब्ध सुविधाएँ, कमियाँ, पेयजल आपूर्ति, शौचालय व्यवस्था, सखी वन स्टॉप सेंटर, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, महतारी वंदन योजना ई-केवाईसी, पालना घर संचालन, नवा बिहान, बाल विवाह रोकथाम, बाल कल्याण समिति सहित अन्य योजनाओं की समीक्षा की।
उन्होंने निर्देशित किया कि आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से महिला एवं बाल विकास विभाग की सभी महत्वपूर्ण योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। आंगनबाड़ी केंद्र समय पर संचालित हों तथा बच्चों को निर्धारित अनुसार गर्म नाश्ता, भोजन, किशोरी बालिकाओं एवं गर्भवती-शिशुवती महिलाओं को समय पर पोषण आहार दिया जाए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि गंभीर कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) के माध्यम से उन्हें सुपोषित बनाया जाए।
आंगनबाड़ी में आने वाले बच्चों की सीखने की क्षमता को बढ़ाने हेतु निर्धारित शैक्षणिक गतिविधियाँ नियमित रूप से संचालित की जाएँ। उन्होंने सुपोषण चौपाल आयोजित कर योजनाओं की जानकारी देने, ग्राम पंचायतों में महिला सरपंचों एवं महिला जनप्रतिनिधियों को शामिल करने तथा छोटे बच्चों के वजन बढ़ाने, किशोरी बालिकाओं और गर्भवती- शिशुवती महिलाओं के स्वास्थ्य सुधार हेतु पूरक आहार एवं स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों के सेवन की जानकारी साझा करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर श्री दुदावत ने मध्यम एवं गंभीर कुपोषित बच्चों को कुपोषण चक्र से बाहर निकालने के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों के घर-घर जाकर माताओं को जागरूक किया जाए और उन्हें अतिरिक्त पौष्टिक आहार समय पर वितरित किया जाए। प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने स्पष्ट निर्देशित किया कि योजना का क्रियान्वयन गंभीरता और प्राथमिकता से किया जाए। परियोजना अधिकारी एवं पर्यवेक्षक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से एएनसी पंजीयन की जानकारी लेकर प्रकरण दर्ज कराएं और हितग्राहियों को समयबद्ध लाभ दिलाएं।
कलेक्टर ने महतारी वंदन योजना अंतर्गत होने वाले भुगतान की जानकारी प्रत्येक माह प्रेषित करने, भुगतान अटके होने पर कारण ज्ञात कर तत्काल समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने ई-केवाईसी कार्य में तेजी लाने और इसे दस दिनों के भीतर पूर्ण करने को कहा। आंगनबाड़ी केंद्रों में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने हेतु नियमित शैक्षणिक गतिविधियाँ संचालित करने और आवश्यकता होने पर परियोजना स्तर पर प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने टीएचआर वितरण सहित विभागीय योजनाओं की जानकारी निर्धारित पोर्टल पर समय पर अपलोड करने, लिंक में डाटा एंट्री सुनिश्चित करने तथा पोषण ट्रैकर में प्रतिदिन जानकारी दर्ज करने कहा।
बैठक में कलेक्टर ने बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड एवं बाल देखरेख संस्थाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि संस्थाओं में शासन द्वारा निर्धारित सभी मानकों का अनिवार्य रूप से पालन किया जाए। साफ-सफाई, आवासीय सुविधाओं और भोजन वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो। आकस्मिक निरीक्षण के दौरान शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी। उन्होंने बच्चों के आधार, जाति प्रमाणपत्र एवं आयुष्मान कार्ड बनवाने के निर्देश दिए। साथ ही सुकन्या समृद्धि योजना के लाभ बताते हुए अधिक से अधिक बालिकाओं के खाते खुलवाने कहा।
पालना केंद्र संचालन हेतु रिक्त पदों पर 15 दिनों के भीतर भर्ती प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्यरत महिलाओं से बैठक लेकर उन्हें उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दें और केंद्र का नियमित संचालन करते हुए लाभार्थियों की संख्या बढ़ाई जाए।
इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ दिनेश कुमार नाग, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास बसंत मिंज, परियोजना अधिकारी सीडीपीओ सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

गंभीर कुपोषित बच्चों को एनआरसी लाकर सुपोषित बनाएं

कलेक्टर श्री दुदावत ने सभी परियोजना एवं सेक्टर अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे गंभीर कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर पोषण पुनर्वास केंद्र में अनिवार्य रूप से भेजें। पहले गंभीर कुपोषित और बाद में मध्यम कुपोषित बच्चों को एनआरसी भेजा जाए। उन्होंने कहा कि एनआरसी का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित किया जाए। कम वजन वाले बच्चों का वजन बढ़ाने तथा आंगनबाड़ी का समय पर संचालन करते हुए पोषण आहार का वितरण नियमित रूप से किया जाए।

बारिश से पहले नए भवनों में आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन सुनिश्चित करें

कलेक्टर ने जिले में भवनविहीन एवं जर्जर आंगनबाड़ी केंद्रों की जानकारी 15 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि जल्द स्वीकृतियाँ प्रदान की जा सकें। उन्होंने जर्जर आंगनबाड़ी केंद्रों का परीक्षण करने, फोटो सहित विवरण भेजने के निर्देश दिए। कहा कि बारिश के बाद किसी भी केंद्र के जर्जर होने की शिकायत न आए, इसलिए अभी से तैयारी की जाए। लक्ष्य अधिकतम आंगनबाड़ी केंद्रों को बारिश पूर्व नए भवनों में शिफ्ट करने का है। उन्होंने सीडीपीओ को पूर्व में स्वीकृत केंद्रों के कार्य पूर्ण कराने हेतु ग्राम पंचायतों से निरंतर संपर्क में रहने कहा। आंगनबाड़ी में लगाई गई पानी टंकियों को पानी स्रोत से जोड़ने हेतु जिला पंचायत सीईओ को निर्देश दिए।

बाल विवाह रोकथाम के लिए निरंतर अभियान चलाएं

कलेक्टर ने जिले में बाल विवाह रोकथाम के लिए जन-जागरूकता बढ़ाने तथा जनप्रतिनिधियों के माध्यम से पिछड़े क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कम उम्र में विवाह और गर्भधारण से महिलाओं में एनीमिया तथा बच्चों में कुपोषण सहित कई स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। अतः सभी पंचायतों में बाल विवाह मुक्त कोरबा-छत्तीसगढ़ अभियान में व्यापक सहभागिता सुनिश्चित की जाए।

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