
समर्पित एक्सेस टू जस्टिस फॉर चिल्ड्रन ने प्रशासन के साथ मनाया सतर्कता दिवस

बाल विवाह मुक्त जिला बनाने का संकल्प
जशपुरनगर 22 अप्रैल 2026/ अक्षय तृतीया के अवसर पर जशपुर जिले में बाल विवाहों की रोकथाम के लिए विशेष सतर्कता अभियान चलाया गया। बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए कार्यरत संगठन समर्पित एक्सेस टू जस्टिस फॉर चिल्ड्रन ने जिला प्रशासन, बाल विवाह निषेध अधिकारियों एवं आशा यूनिटों के सहयोग से “सतर्कता दिवस” मनाते हुए बाल विवाह मुक्त समाज का संकल्प दोहराया। इस अवसर पर संगठन द्वारा जिले के विभिन्न गांवों, पंचायतों और स्कूलों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया। धर्मगुरुओं, जनप्रतिनिधियों और समुदाय के लोगों को जोड़कर बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी गई तथा हजारों लोगों को बाल विवाह के विरुद्ध शपथ दिलाई गई। संगठन द्वारा विशेष रूप से अक्षय तृतीया जैसे संवेदनशील अवसरों पर बाल विवाह रोकने के लिए सक्रिय अभियान चलाया जाता रहा है।
संगठन के निदेशक डॉ.संदीप शर्मा ने कहा कि अक्षय तृतीया जैसे शुभ अवसर की आड़ में बाल विवाह जैसे अपराध को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि प्रशासन और नागरिक समाज के संयुक्त प्रयासों से अब इस दिन होने वाले बाल विवाहों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है, हालांकि इसे पूरी तरह समाप्त करने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने जानकारी दी कि कुछ वर्ष पहले तक लोगों को यह जानकारी नहीं थी कि नाबालिगों की शादी बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत दंडनीय अपराध है। इस कानून के अंतर्गत बाल विवाह में किसी भी रूप में शामिल होने या सहयोग करने पर दो वर्ष तक की सजा एवं जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। इसमें केवल वर-वधू पक्ष ही नहीं, बल्कि बाराती, कैटरर, डेकोरेटर, हलवाई, बैंड-बाजा संचालक, विवाह स्थल के संचालक तथा विवाह संपन्न कराने वाले पुरोहित या मौलवी भी दोषी माने जाते हैं। डॉ. शर्मा ने कहा कि लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों का सकारात्मक प्रभाव अब दिखाई दे रहा है। लोग अब बाल विवाह की सूचना प्रशासन को देने लगे हैं और प्रशासन द्वारा त्वरित कार्रवाई कर ऐसे मामलों को रोका जा रहा है। यह बदलाव समाज में बढ़ती जागरूकता का संकेत है। उल्लेखनीय है कि जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन नेटवर्क के सहयोग से देश के 450 से अधिक जिलों में बाल विवाह के खिलाफ अभियान संचालित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से अब तक 5 लाख से अधिक बाल विवाह रोके जा चुके हैं। जशपुर जिले में चल रहा यह सतर्कता अभियान बाल अधिकारों की रक्षा और बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।



