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एनटीपीसी कोरबा में इंटक का शक्ति प्रदर्शन – अनुभवी नेतृत्व के साथ भविष्य के संकल्प की आमसभा सम्पन्न

कोरबा, 12 अक्टूबर। एनटीपीसी कोरबा में राष्ट्रीय ताप विद्युत कर्मचारी संघ (इंटक) ने रविवार को एक विशिष्ट आमसभा का आयोजन किया, जिसमें इंटक के सेंट्रल लीडर बाबर सलीम पाशा, राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेशाध्यक्ष संजय कुमार सिंह तथा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आर.सी. खुटिया के सानिध्य में कार्यकर्ताओं और सदस्यों का उत्साह देखते ही बन रहा था। यह सभा आगामी 15 अक्टूबर 2025 को होने वाले प्रतिनिधि यूनियन चुनाव और कर्मचारियों से जुड़े समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही, जिसमें इंटक नेताओं ने कर्मचारियों से भावनात्मक जुड़ाव बनाते हुए उनके भविष्य को सुरक्षित रखने का आह्वान किया।

सभा की शुरुआत में संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि अक्टूबर 2022 में कर्मचारियों ने जिस भरोसे और विश्वास से इंटक को समर्थन दिया था, संगठन ने उसे पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ निभाया है। इंटक का मानना है कि यह चुनाव किसी व्यक्ति की हार या जीत का नहीं बल्कि कर्मचारियों के भविष्य के निर्धारण का चुनाव है। आने वाला वर्ष 2027 पे रिविजन का वर्ष होगा और इसके लिए ऐसा नेतृत्व चाहिए जो अनुभवी, सक्षम और कर्मचारियों की जरूरतों को गहराई से समझने वाला हो।

इंटक नेताओं ने अपने भाषणों में विपक्षी यूनियनों की कार्यशैली पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास न तो नेतृत्व की स्थिरता है और न ही अनुभव की परिपक्वता। 2013 में जब विपक्षी गुटों को कोरबा की सत्ता मिली थी, तब अनुभवहीनता और कमजोर निर्णय क्षमता के कारण उन्होंने श्रमिक शिक्षा कार्यक्रम बंद करवा दिए, जनरेशन इंसेंटिव रोक दिए, फैमिली प्लानिंग के दो इंक्रीमेंट बंद करा दिए, ओटी को सी-ऑफ में बदलने का प्रयास किया और पर्सनल इन्टाइटिल जैसी सुविधाएँ समाप्त करवा दीं। इतना ही नहीं, 2019 में दोबारा सत्ता मिलने पर उन्होंने चांपा बस सेवा बंद कर दी, DT-2016 बैच के पे फिक्सेशन का विरोध किया, बोनस और एम्सग्रेसिया को घटाया तथा शिफ्ट रोटा पर कर्मचारियों के हितों की रक्षा के बजाय प्रबंधन का साथ दिया।

सभा में यह भी कहा गया कि जब DM Plant में शिफ्ट व्यवस्था बंद कर दी गई और कर्मचारियों को जनरल ड्यूटी में बदला गया, तब ये विपक्षी गुट हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे, एक विरोध तक नहीं किया बल्कि उल्टे प्रबंधन के फैसले को सही ठहराने लगे। यही नहीं, जिनके समर्थन से बनी सरकार श्रमिकों के अधिकारों को समाप्त करने पर तुली है, उन विपक्षी गुटों ने उसके खिलाफ एक बार भी आवाज नहीं उठाई। देशभर में जब श्रम कानूनों को खत्म कर 44 अधिनियमों की जगह चार कोड बिल लाए गए, तब इंटक सहित सभी प्रमुख यूनियनों ने 12 बार देशव्यापी हड़ताल की, लेकिन ये विपक्षी गुट एक बार भी शामिल नहीं हुए। इससे स्पष्ट है कि विपक्षी संगठन कर्मचारी हितों की रक्षा नहीं करते बल्कि सरकार और प्रबंधन के पक्ष में काम करते हैं।

सभा में इंटक नेतृत्व ने अपनी उपलब्धियों का विस्तृत उल्लेख किया। बताया गया कि 2022 से 2025 के अपने कार्यकाल में इंटक यूनियन ने कर्मचारियों के हित में अनेक ऐतिहासिक कार्य किए हैं। इंटक ने शिफ्ट रोटा की लड़ाई जीतकर कर्मचारियों को जनरल शिफ्ट पंचिंग व्यवस्था से मुक्त कराया, कर्मचारियों को उनकी पसंद के अनुसार बी-टाइप क्वार्टर दिलवाए, नया कल्याण मंडपम बनवाया, सभी कार्यस्थलों पर एसी, वाटर कूलर और स्वच्छ टॉयलेट की व्यवस्था कराई। कॉलोनी के आवासों का रिनोवेशन कराया गया जिसमें वेस्टर्न टॉयलेट लगाए गए। ईपीएस 95 पेंशन लागू कराने के लिए निरंतर प्रयास किए गए। रिटायरमेंट दिवस पर ट्री प्लांटेशन की नई परंपरा शुरू की गई, कर्मचारियों के लिए नया मेडिकल बुक (PRMS) बनवाया गया, स्पोर्ट्स काउंसिल के माध्यम से खेल जैकेट का वितरण हुआ और सेफ्टी सेक्शन से इंडक्शन हीटर व हेलमेट की व्यवस्था की गई। सिल्वर जुबली पार्क में वॉकिंग ट्रैक का निर्माण हुआ, बिलासपुर के लिए एसी बस सेवा शुरू की गई, टाउनशिप में ऊर्जा द्वार, मार्केट और गेस्ट हाउस का जीर्णोद्धार कराया गया और मानसरोवर में हाईमास्ट लाइट लगाई गई।

इंटक यूनियन ने सेंट्रल स्तर पर भी अनेक उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। सेंट्रल नेतृत्व की मजबूत पकड़ और अनुभव के कारण एनबीसी में इंटक सबसे बड़ा मेजारिटी यूनियन बना है। इंटक ने 2017 में कर्मचारियों के लिए बेहतर पे रिविजन दिलवाया, DT-2016, 2017 और 2018 बैच के कर्मचारियों को पे बेनिफिट दिलवाया, पीआरपी को फिक्स प्रतिशत में सुनिश्चित कराया, कई कर्मचारियों को सस्पेंशन से वापस बुलवाया, ग्रुप इंश्योरेंस राशि में वृद्धि करवाई, लैपटॉप और फर्नीचर बायबैक योजना दिलाई, मृत कर्मचारियों के परिवारों को आवास, चिकित्सा और शिक्षा सुविधाएँ दिलवाईं और E1 परीक्षा को पुनः प्रारंभ करवाया।

सभा के अंत में इंटक नेताओं ने कर्मचारियों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि यह चुनाव किसी व्यक्ति की विदाई या सम्मान का नहीं, बल्कि आने वाले कल का चुनाव है। यह उन कर्मचारियों के भविष्य का निर्णय है जो आने वाले वर्षों में एनटीपीसी की सेवा में रहेंगे और जिनका पे रिविजन 2027 में होना है। इसलिए प्रत्येक कर्मचारी को ऐसे अनुभवी और कर्मठ संगठन का चयन करना चाहिए जो उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ सके, उनकी जरूरतों को समझ सके और प्रबंधन के सामने उनकी आवाज़ बुलंद कर सके।

सभा के अंत में जब पूरा पंडाल “हक के लिए लड़ो, इंटक के साथ चलो” के नारों से गूंज उठा, तो यह स्पष्ट हो गया कि एनटीपीसी कोरबा में कर्मचारियों का भरोसा और विश्वास एक बार फिर इंटक यूनियन के पक्ष में मज़बूती से खड़ा है।

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