featuredकोरबाछत्तीसगढ़

ज्ञानभारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान- कोरबा में सांस्कृतिक विरासत संरक्षण का सशक्त अभियान

श्रीराम गुफा मंदिर सीतामढ़ी में प्राप्त हुई 14 दुर्लभ पांडुलिपियां

डिजिटल संरक्षण से सुरक्षित हुई अमूल्य धरोहर रूपी प्राचीन पांडुलिपियां

कोरबा, 07 मई 2026/भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘‘ज्ञानभारतम‘‘ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के अंतर्गत कोरबा जिले में भारतीय ज्ञान परंपरा एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण हेतु व्यापक, सुनियोजित एवं प्रभावी कार्यवाही निरंतर जारी है। इस अभियान का उद्देश्य देश के विभिन्न क्षेत्रों में बिखरी प्राचीन एवं दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान, दस्तावेजीकरण, डिजिटल संरक्षण तथा भावी पीढ़ियों के लिए उनके सुरक्षित संवहन को सुनिश्चित करना है।
जिले के कलेक्टर  कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा इस महत्वाकांक्षी अभियान को गंभीरता एवं प्रतिबद्धता के साथ क्रियान्वित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत जिले के विभिन्न प्राचीन, ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों में सर्वेक्षण कर उन पांडुलिपियों का संकलन एवं संरक्षण किया जा रहा है, जो अब तक निजी संरक्षण में सुरक्षित थीं और सार्वजनिक रूप से प्रकाश में नहीं आ सकी थीं।
इसी कड़ी में बुधवार को कोरबा नगर के समीप स्थित अत्यंत प्राचीन एवं आस्था के प्रमुख केंद्र श्रीराम गुफा मंदिर सीतामढ़ी में जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में ‘‘ज्ञानभारतम‘‘ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के जिला समन्वयक श्री सतीश प्रकाश सिंह की अगवाई में ‘‘ज्ञानभारतम दूत‘‘ युवा टीम कोरबा द्वारा विस्तृत सर्वेक्षण किया गया। यह स्थल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी प्राचीन गुफाओं एवं सांस्कृतिक परंपराओं के कारण ऐतिहासिक महत्ता भी रखता है। वर्षों से साधना, श्रद्धा एवं सांस्कृतिक निरंतरता का केंद्र रहा यह स्थल आज पुनः एक नई पहचान के साथ उभरकर सामने आया, जब यहां 14 अत्यंत दुर्लभ एवं प्राचीन पांडुलिपियों का प्राप्त होना सुनिश्चित हुआ।
जिला समन्वयक श्री सिंह ने बताया कि मंदिर के पुजारी  दुकालू श्रीवास (पिता स्व. मातादीन श्रीवास) द्वारा इन पांडुलिपियों को अत्यंत श्रद्धा एवं सावधानी के साथ वर्षों से सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने जानकारी दी कि ये पांडुलिपियां उन्हें उनके पिता से प्राप्त हुई थीं, जिन्हें उनके पूर्वजों द्वारा सहेजकर रखा गया था। इस प्रकार यह अनमोल धरोहर पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती रही है, जो भारतीय पारिवारिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों की सजीव परंपरा को भी दर्शाती है। प्राप्त पांडुलिपियों का अध्ययन करने पर ज्ञात हुआ कि इनमें ओड़िया भाषा का प्रयोग किया गया है। इनकी लिपि की प्रमुख विशेषता इसके गोलाकार अक्षर हैं, जिन्हें मुंडिया’ कहा जाता है। विद्वानों के अनुसार प्राचीन काल में ताड़पत्रों पर लेखन के दौरान उनकी संरचना को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से सीधी रेखाओं के स्थान पर गोलाकार अक्षरों का विकास किया गया, जिससे पत्तों की नसें फटने से बच सकें। इन पांडुलिपियों का कालखंड अनुमानतः 15 वीं से 19 वीं शताब्दी के मध्य का माना जा रहा है। विशेष उल्लेखनीय तथ्य यह है कि इन पांडुलिपियों के दोनों पक्षों (आगे एवं पीछे) पर लेखन अंकित है, जो उस काल की लेखन शैली एवं ज्ञान परंपरा की विशिष्टता को दर्शाता है।
जिला समन्वयक श्री सिंह ने इन पांडुलिपियों को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि इस प्रकार की विरासत केवल धार्मिक या ऐतिहासिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक पहचान एवं ज्ञान-संपदा का आधार भी है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘‘ज्ञानभारतम‘‘ मिशन राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के उद्देश्य एवं महत्ता को बताते हुए कहा कि यदि किसी के पास भी ऐसी कोई प्राचीन पांडुलिपियां, दस्तावेज या धरोहर सुरक्षित हैं, तो वे आगे आकर इस ज्ञानभारतम अभियान में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें, ताकि इन धरोहरों का संरक्षण वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित ढंग से किया जा सके। मौके पर ज्ञानभारतम दूत युवा टीम द्वारा जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह की उपस्थिति में इन प्राचीन दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटल संरक्षण किया गया तथा उन्हें ज्ञानभारतम ऐप में अपलोड कर राष्ट्रीय स्तर पर अभिलेखित किया गया।
इस अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के जिला समन्वयक श्री सिंह द्वारा मंदिर के पुजारी श्री दुकालू श्रीवास को उनके अमूल्य योगदान एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका के लिए मोमेंटो, शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस दौरान कमला नेहरू महाविद्यालय कोरबा के प्राचार्य डॉ. प्रशांत बोपापुरकर, सहायक प्राध्यापक डॉ. सुशीला कुजूर, विकास पांडे सहित ‘‘ज्ञानभारतम दूत‘‘ युवा टीम के शिवराज थवाईत, मानुप्रताप श्रीवास, राज कुरी, खुशबू दिनकर, मुस्कान राजपूत, धारणा केवट, मिली चौहान, शालिनी कुर्रे सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

newsagradoot

News Agradeoot is a trusted Hindi news website delivering the latest breaking news, local updates, national headlines, and in-depth analysis from India and around the world. We focus on politics, education, technology, business, entertainment, and social issues, providing accurate, fast, and unbiased journalism. Our mission is to keep readers informed with reliable news, fact-checked stories, and real-time updates. News Agradeoot believes in responsible digital journalism and reader-first reporting.

Related Articles

Back to top button
⚡ BREAKING
featured Braking…दर्री-कटघोरा मुख्य मार्ग पर चलती  कार में लगी आग, सूझबूझ से बची जान featured “कंट्रोलिंग हाइपरटेंशन टूगेदर‘‘ थीम के साथ मनाया जाएगा विश्व रक्तचाप दिवस featured विशेषज्ञ चिकित्सा अधिकारियों के रिक्त पदों की पूर्ति हेतु आवेदन आमंत्रित featured खुले वाहन में कचरा परिवहन पर होगी सख्त कार्रवाई, सफाई में लापरवाही पर कटेगा वेतन – आयुक्त featured सुशासन तिहार शिविर में जनसमस्याओं का त्वरित निराकरण, महापौर बोलीं- सुशासन की संकल्पना हो रही साकार featured सिरमिना में सुशासन तिहार शिविर आयोजित, 143 आवेदनों का हुआ त्वरित निराकरण featured अफवाहों पर न दें ध्यान, जिले में पेट्रोल-डीजल व एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता -कलेक्टर featured मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजनांतर्गत 15 जोड़ों का विवाह हुआ संपन्न featured अब समाधान में नहीं लग रहा इंतजार : सुशासन तिहार बन रहा जनसमस्याओं के त्वरित समाधान का भरोसेमंद मंच featured सुशासन तिहार 2026 : चित्रलेखा के जीवन में आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत featured अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन पर प्रशासन की लगातार कार्रवाई, 5 हाईवा वाहन जब्त featured केराकछार के सुशासन तिहार में शामिल हुए कलेक्टर, ग्रामीणों की कई मांगों को पूरा करने का किया वादा featured खुशियों का पासवर्ड कार्यक्रम का 18 मई से शुभारम्भ, नशा मुक्ति अभियान रथ भी पहुंचेगा कोरबा featured कैसी हो माताजी… राशन मिल रहा है न?कलेक्टर के आत्मीयता भरे सवाल ने वृद्धा के चेहरे पर लाई मुस्कान featured ‘सेवा सेतु’- छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजीटल प्रशासन का नया अध्याय