कोरबाछत्तीसगढ़

प्रसव के बाद गलत ऑपरेशन और लापरवाही ने ली प्रसूता की जान,2 बच्चों के सिर से उठा मां का साया

कोरबा। वैसे तो लोग डॉक्टर को लोग भगवान का रूप मानते हैं लेकिन डॉक्टर आजकल मनमानी पर उतर आए हैं उनकी इस मनमानी के चलते कई बार लोगों को अपने मरीज की जान से भी हाथ धोना पड़ता है।ऐसा ही एक मामला श्वेता हॉस्पिटल से सामने आया है जहां 1 जून को गोढ़ी निवासी रणजीत सिंह अपनी पत्नी अंजली सिंह को प्रसव के लिए लेकर आए थे डॉक्टर ने अंजलि के ऑपरेशन करने की बात कही और आनन फानन में अंजली का ऑपरेशन कर दिया । जिससे अंजलि ने एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया। लेकिन धीरे-धीरे अंजलि की तबीयत बिगड़ने लग गई। अंजलि के शरीर से रक्त का बहाव तेज होने लग गया।रविवार पड़ने की वजह से श्वेता हॉस्पिटल में डॉक्टर भी उपलब्ध नहीं थे इसलिए वहां नर्सों के सहारे मरीज को छोड़ दिया गया।

अंजलि की हालत लगातार खराब होते देख हॉस्पिटल स्टाफ ने डॉक्टर को कई बार कॉल किया लेकिन पूरा दिन और पूरी रात बीत जाने के बाद भी डॉ. श्वेता वहां नहीं पहुंची। सोमवार की सुबह 11 बजे डॉ. श्वेता हॉस्पिटल पहुंची और अंजली की खराब स्थिति को देखते हुए उन्होंने मरीज को ये कहते हुए रिफर कर दिया कि हमारे पास पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।

आनन फानन में अंजली के परिजन उसे nkh हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। जहां अंजलि की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए डॉ. ने परिजनों को पहले ही बता दिया कि उम्मीद न के बराबर है। परिजनों के कहने पर अंजली का इलाज शुरू हुआ लेकिन सोमवार रात 11 बजे अंजली ने इस दुनियां को अलविदा कह दिया। अंजलि का ढाई वर्षीय पुत्र और 2 दिन के पुत्र के सिर से मां का साया हमेशा हमेशा के लिए छिन गया।

अंजलि की ननद ने भी श्वेता नर्सिंग होम की संचालिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

Nkh हॉस्पिटल के संचालक डॉ. चंदानी ने बताया कि जिस कंडीसन में मरीज को लाया गया था उसकी पूरी जानकारी उन्होंने परिजन को दी थी। श्वेता हॉस्पिटल की संचालिका डॉ. श्वेता ने भी परिजनों के लगाए तमाम आरोपों से इनकार किया है।

गौरतलब है कि निजी अस्पतालों द्वारा इलाज के नाम पर मरीज के परिजन से मोटी रकम वसूली जाती है अपने मरीज की जान की रक्षा के लिए लोग वह भी देने को तैयार हो जाते हैं बावजूद इसके रकम भी चली जाए और मरीज की जान भी ना बचे यह कहां का न्याय है । शहर में संचालित निजी अस्पतालों में पर्याप्त सुविधा के बगैर ही मरीजों की भर्ती ले ली जाती है और फिर आखरी कंडीशन में उन्हें कहीं और शिफ्ट करने की बात की जाती है । लेकिन जिस कंडीशन में उन्हें शिफ्ट करने की बात की जाती है वह कंडीशन आखिरी ही होती है जहां से मरीज का बच पाना ही नामुमकिन सा हो जाता है। ऐसे में ऐसे निजी अस्पतालों पर लगाम लगाने की जरूरत है।

फिलहाल परिजनों ने इस पूरे घटनाक्रम की शिकायत सिविल लाईन थाने में करते हुए अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।

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