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सुशासन की खेती, भरोसे की फसल ,विशेष लेख : लोकेश्वर सिंह

धान खरीदी 2025-26: मनेन्द्रगढ़- चिरमिरी- भरतपुर जिले में परिवर्तन का ऐतिहासिक अध्याय


मुख्यमंत्री का किसान-प्रधान नेतृत्व-3100 रुपये समर्थन मूल्य और 21 क्विंटल सीमा से बदली ग्रामीण अर्थव्यवस्था


‘तुहर टोकन 24×7’ से सम्मान की खरीदी-तकनीक, पारदर्शिता और सुविधा का नया मानक


25 उपार्जन केन्द्रों से 2.33 लाख क्विंटल से अधिक धान खरीदी-आँकड़ों से आगे किसानों के भरोसे की कहानी

एमसीबी/17 दिसम्बर 2025/ खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 छत्तीसगढ़ के कृषि इतिहास में एक ऐसे परिवर्तनकारी दौर के रूप में दर्ज हो रहा है, जहाँ धान खरीदी अब केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रही, बल्कि किसान और सरकार के बीच विश्वास, पारदर्शिता और सम्मान की मजबूत कड़ी बनकर उभरी है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला इस बदलाव का सजीव उदाहरण है, जहाँ सुशासन, तकनीकी दक्षता और किसान-हितैषी दृष्टिकोण ने मिलकर नई परिभाषा गढ़ी है।
राज्य सरकार द्वारा प्रदेश स्तर पर 15 नवम्बर 2025 से धान खरीदी प्रारंभ की गई, जबकि मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में समुचित प्रशासनिक तैयारी और व्यवस्थागत सुदृढ़ता के साथ 17 नवम्बर 2025 से खरीदी की शुरुआत हुई। यह अंतर किसी विलंब का नहीं, बल्कि बेहतर प्रबंधन, तकनीकी तैयारी और किसान-अनुकूल संचालन का प्रमाण रहा। परिणामस्वरूप 17 नवम्बर से 16 दिसम्बर 2025 तक जिले के सभी 25 उपार्जन केंद्रों में धान खरीदी पूर्णतः सुचारू, व्यवस्थित और पारदर्शी रूप से संचालित होती रही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का निर्णायक नेतृत्व-किसान हित सर्वाेपरि
मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने इस खरीफ विपणन वर्ष में किसान को नीति के केंद्र में रखा। प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी की सीमा और 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य का निर्णय किसानों के लिए केवल आर्थिक घोषणा नहीं, बल्कि उनके श्रम के सम्मान और भविष्य की सुरक्षा का भरोसेमंद आधार बना।
इस नीति का प्रत्यक्ष प्रभाव एमसीबी जिले में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया-किसान पंजीयन में वृद्धि, उपार्जन केन्द्रों पर उत्साहपूर्ण सहभागिता और संतोषजनक माहौल। धान खरीदी से प्राप्त आय का सीधा प्रवाह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में हुआ, जिससे स्थानीय बाजार, श्रमिक वर्ग और छोटे व्यवसायों को भी मजबूती मिली।

तकनीक और पारदर्शिता का संगम-‘तुहर टोकन 24×7’
इस वर्ष धान खरीदी व्यवस्था में तकनीक का प्रभावी उपयोग सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रहा। ‘तुहर टोकन 24×7’ प्रणाली ने किसानों की वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान किया। अब किसान अपनी सुविधा अनुसार टोकन प्राप्त कर निर्धारित समय पर उपार्जन केन्द्र पहुँच रहे हैं, जिससे लंबी कतारों, अनिश्चित प्रतीक्षा और अव्यवस्था से मुक्ति मिली है। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह व्यवस्था सम्मानजनक, समयबद्ध और भरोसेमंद सिद्ध हुई है।

25 उपार्जन केन्द्र-भरोसे और व्यवस्था का मजबूत नेटवर्क
17 नवम्बर 2025 से 16 दिसंबर 2025 तक जिले के 25 उपार्जन केन्द्रों में कुल 2,33,999.80 क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है। यह आँकड़ा केवल मात्रा का नहीं, बल्कि किसानों के बढ़ते विश्वास और प्रशासनिक दक्षता का प्रमाण है।
कछौड़ (5931.20 क्विंटल), कमर्जी (5867.20), केल्हारी (18122.00), कोटाडोल (5957.60), रापा (3221.80), कटकोना (8916.40), कोडा (14852.00), कौड़ीमार (13943.20), खड़गवां (12070.80), बरदर (10097.60), जनकपुर (16098.00), माडीसरई (15836.40) सहित सभी केन्द्रों में खरीदी प्रक्रिया सुव्यवस्थित एवं पारदर्शी रही।

दैनिक सार्वजनिक सूचना-विश्वास की मजबूत नींव
धान खरीदी की प्रगति को प्रतिदिन सार्वजनिक करना शासन की पारदर्शी कार्यशैली का सशक्त उदाहरण है। जिले एवं प्रदेश स्तर पर नियमित अपडेट से किसानों को सटीक जानकारी मिली और किसी भी प्रकार की भ्रांति या अफवाह की गुंजाइश नहीं रही।

समावेशी नीति और एग्रीस्टेक
एग्रीस्टेक के अंतर्गत अधिया, रेगहा किसान, वनाधिकार पट्टाधारी, डूबान क्षेत्र के किसान सहित सभी पात्र श्रेणियों को स्पष्ट दिशा-निर्देशों के साथ लाभ दिया गया। इससे व्यवस्था अधिक समावेशी, निष्पक्ष और भरोसेमंद बनी।

त्वरित भुगतान और अवैध धान पर सख्त
धान विक्रय के साथ-साथ समयबद्ध भुगतान को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी गई। किसानों को उनकी उपज का मूल्य सीधे बैंक खातों में प्राप्त हो रहा है। वहीं अवैध धान के विरुद्ध सख्त निगरानी और कार्रवाई से ईमानदार किसानों के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित हुई।

पॉजिटिव स्टोरी बैंक-प्रशासन से आगे मानवता की कहानी
जिले में विकसित पॉजिटिव स्टोरी बैंक ने धान खरीदी को मानवीय संवेदनाओं से जोड़ा है। सफल किसान, संतुष्ट हितग्राही और सुव्यवस्थित उपार्जन केन्द्र इस बात के प्रमाण हैं कि धान खरीदी अब केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसानों के जीवन में स्थिरता, आत्मविश्वास और सम्मान का माध्यम बन चुकी है। धान खरीदी 2025-26 का यह अध्याय यह सिद्ध करता है कि जब नीति, तकनीक और संवेदनशील प्रशासन एक साथ चलते हैं, तब सुशासन खेतों में फलता है और भरोसे की फसल पूरे समाज को समृद्ध करती है।

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