छत्तीसगढ़

मैं भी एक दिन पहनूंगी पुलिस की वर्दी’, गरीब किसान की बेटी साधना यादव ने रच दिया इतिहास

जांजगीर चांपा 10 दिसम्बर। छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले के जांजगीर क्षेत्र के पुटपुरा गांव की साधना यादव ने इतिहास रच दिया है। एक किसान की बेटी साधना ने छत्तीसगढ़ पुलिस में सिपाही बनकर अपने गांव का नाम रोशन किया है। सीमित संसाधनों के बावजूद, साधना ने कड़ी मेहनत और लगन से सफलता प्राप्त की, जो अन्य युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।
सपनों की शुरुआत
साधना यादव का जन्म पुटपुरा गाँव के एक साधारण से किसान परिवार में हुआ। उनके पिता मेंघराज यादव एक मेहनती किसान हैं जो खेतों में दिन-रात पसीना बहाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। साधना यादव की घर की आर्थिक स्थिति कभी बहुत अच्छी नहीं रही। खेती-बाड़ी से होने वाली आय परिवार के लिए मुश्किल से पर्याप्त थी लेकिन एक जूझारु और परिश्रमी पिता ने कभी अपनी बेटी की पढ़ाई में कमी नहीं आने दी।साधना बचपन से ही पढ़ाई में होशियार थी। गांव के स्कूल में पढ़ते हुए उसने हमेशा अच्छे अंक हासिल किए। लेकिन गांव का माहौल ऐसा था कि लड़कियों की पढ़ाई को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था। कई लोग मेंघराज को ताने मारते बेटी को इतना पढ़ाकर क्या करोगे शादी कर देना ही है। लेकिन मेंघराज का विश्वास अटल था। वह कहते मेरी बेटी कुछ बड़ा करेगी। मैं उसे पढ़ाऊंगा, चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं।
सपना जो बन गया जुनून
साधना को बचपन से ही पुलिस की वर्दी में एक अलग ही आकर्षण दिखता था। जब भी वह गांव में किसी पुलिसकर्मी को देखती, उसके मन में एक बात उठती कि वह भी एक दिन ऐसी ही वर्दी पहनेगी। यह सपना केवल एक बचपन की चाहत नहीं था बल्कि समय के साथ यह उसके जुनून में बदल गया। साधना ने हाई स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई पूरी की लेकिन पुलिस भर्ती की तैयारी के लिए उसे और मेहनत की जरूरत थी।
छत्तीसगढ़ मे पुलिस भर्ती की प्रक्रिया आसान नहीं होती। इसमें लिखित परीक्षा फिजिकल परीक्षा और मेडिकल टेस्ट शामिल होते हैं। साधना के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी संसाधनों की कमी। गांव में न तो कोई कोचिंग सेंटर था न ही कोई ऐसा व्यक्ति जो उसे सही मार्गदर्शन दे सके। लेकिन साधना ने हार नहीं मानी उसने अपने बहन भाई और पिता की मदद से पुराने किताबों और इंटरनेट से सामग्री जुटाई और लग गई पूरे जुनून से अपने लक्ष्य की ओर।
मेहनत का रास्ता
साधना की दिनचर्या बेहद कठिन थी। सुबह जल्दी उठकर वह घर के कामों में मां की मदद करती इसके बाद वह अपनी पढ़ाई शुरू करती। गांव में बिजली की समस्या आम थी। कई बार तो रात में दिये की रोशनी में भी पढ़ते हुए मन में उम्मी की लौ जलाए हुई थी
फिजिकल टेस्ट की तैयारी के लिए साधना को और मेहनत करनी पड़ी। गांव में कोई खेल का मैदान नहीं था इसलिए वह खेतों के बीच बने पगडंडियों पर दौड़ लगाती। सुबह और शाम के समय वह घंटों दौड़ने का अभ्यास करती। कई बार थकान इतनी होती कि वह गिर पड़ती, लेकिन हर बार वह और मजबूती से उठती।
पहली असफलता और नया जोश
साधना ने पहली बार पुलिस भर्ती परीक्षा दी लेकिन वह फिजिकल टेस्ट क्वालीफाई नहीं कर पाई। यह उसके लिए बड़ा झटका था। कुछ लोग ताने मारने लगे देखा, लड़कियों का काम नहीं है ये सब लेकिन साधना ने इन बातों को दिल से नहीं लगाया। उसने अपने पिताऔर माँ से कहा की मैं फिर कोशिश करूंगी। इस बार मैं जरूर पास होऊंगी।
पिती साधना ने भी अपनी बेटी का हौसलों को डगमगाने नहीं दिया और उत्साह बढ़ाते हुए कहा बेटी असफलता तो सफलता की सीढ़ी है। तुम मेहनत करो, मैं तुम्हारे साथ हूं।साधना ने अपनी कमियों को पहचाना और उन पर काम शुरू किया। उसने अपनी दौड़ की गति बढ़ाने के लिए और अभ्यास किया। साथ ही, लिखित परीक्षा के लिए उसने अपनी मेहनत को दोगुना कर दिया।
सपना हुआ साकार
साधना ने 2025 में दोबारा पुलिस भर्ती परीक्षा दी। इस बार उसने लिखित परीक्षा में अच्छे अंक हासिल किए और फिजिकल टेस्ट में भी शानदार प्रदर्शन किया। जब अंतिम परिणाम घोषित हुआ, तो साधना का नाम चयनित उम्मीदवारों की सूची में था। यह खबर सुनते ही घर गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। साधना के घर बधाई देने वालों का तांता लग गया।

मेंघराज की आंखों में खुशी के आंसू थे। उन्होंने कहा मेरी बेटी ने मेरा सिर ऊंचा कर दिया। आज मुझे गर्व है कि मैंने उसे पढ़ाया और सपने देखने की आजादी दी। साधना की मां ने अपनी बेटी को गले लगाते हुए इस मौके पर भावुक हो उठी। भाईयों की आंखे खुशी से नम हुई
गांव के लिए ऐतिहासिक पल
साधना की सफलता इसलिए भी खास थी क्योंकि यह पुटपुरा गांव से पुलिस सेवा में भर्ती होने वाली पहली लड़की है साधना की इस उपलब्धि ने गांव के अन्य युवाओं को भी प्रेरित किया। कई लड़के-लड़कियां अब साधना से प्रेरणा लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने का मन बना चुके हैं।अपने माता-पिता और भाईयों को सारा श्रेय देते हुए कहा कि मैं अपने माता-पिता और भाइयों की आभारी हूं जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया। मैं वर्दी पहनकर अपने गांव और देश की सेवा करूंगी
साधना ने दिया गांव के युवओं को संदेश
साधना की कहानी उन सभी लोगों के लिए एक प्रेरणा है जो यह सोचते हैं कि गांव में रहकर या सीमित संसाधनों में बड़े सपने नहीं देखे जा सकते। साधना का मानना है कि मेहनत और लगन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। वह कहती हैं हमें अपने सपनों के पीछे भागना चाहिए चाहे रास्ता कितना भी मुश्किल क्यों न हो। असफलता से डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि हर असफलता हमें कुछ नया सिखाती है।आगे की राह साधना अब पुलिस ट्रेनिंग के लिए तैयार हो रही हैं। वह अपने कर्तव्यों को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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