
बालोद में नदी पुनर्जीवन की दिशा में बड़ा कदम, वैज्ञानिक और सामुदायिक मॉडल पर होगा कार्य


बालोद, 24 अप्रैल 2026। जिले की जीवनदायिनी तांदुला नदी के पुनरुद्धार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिला प्रशासन के प्रयासों से जल संसाधन विभाग, बालोद और आईआईटी भिलाई के इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी फाउंडेशन के बीच शुक्रवार को औपचारिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
यह परियोजना न केवल तांदुला नदी के पुनर्जीवन का मार्ग प्रशस्त करेगी, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में नदी संरक्षण के लिए एक मॉडल के रूप में स्थापित हो सकती है। एमओयू कार्यक्रम आईआईटी भिलाई में आयोजित हुआ, जिसमें दुर्ग संभाग के आयुक्त सत्य नारायण राठौर, कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा, जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता पीयूष देवांगन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
नदी पुनर्जीवन के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने परियोजना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्तमान में तांदुला नदी कई चुनौतियों का सामना कर रही है, जिनमें सिल्टेशन, प्रदूषण, जल प्रवाह में अस्थिरता और पारिस्थितिक क्षरण शामिल हैं। उन्होंने बताया कि तांदुला जलाशय से हीरापुर एनीकट तक लगभग 3 किलोमीटर क्षेत्र को एक संतुलित, स्वच्छ और पर्यावरणीय रूप से मजबूत नदी तंत्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
आईआईटी भिलाई की तकनीकी भागीदारी
आईआईटी भिलाई की टीम द्वारा परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया, जिसमें वैज्ञानिक सर्वेक्षण, जल गुणवत्ता सुधार, जैव विविधता संरक्षण और आधुनिक जल प्रबंधन तकनीकों को शामिल किया गया है। साथ ही, परियोजना में स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी पर भी विशेष जोर दिया गया है।
राज्य के लिए बन सकता है मॉडल
संभाग आयुक्त सत्य नारायण राठौर ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह परियोजना भविष्य में पूरे राज्य के लिए नदी पुनर्जीवन का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। उन्होंने इसे समयानुकूल और दूरदर्शी कदम बताया।
पर्यटन और पर्यावरण दोनों को मिलेगा बढ़ावा
परियोजना के तहत चयनित क्षेत्र को हाइड्रोलॉजिकल रूप से स्थिर और पारिस्थितिक रूप से समृद्ध नदी कॉरिडोर में विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही नदी जल को स्वच्छ बनाने, जलकुंभी के प्रबंधन और क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की भी योजना है।
बालोद जिला प्रशासन की यह पहल सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी का एक प्रेरणादायी उदाहरण बनने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।



