छत्तीसगढ़

शिक्षिका विधि ने रचा इतिहास — बच्चों के लिए लिखी गई नई ध्यान-पद्धति और पुस्तक की पूरे प्रदेश में हो रही सराहना

राज्य की ताज़ा शैक्षणिक रिपोर्ट ने बढ़ाई नई पद्धति की ज़रूरत — हजारों बच्चे अभी भी गिनती और अक्षर ज्ञान से वंचित

कवर्धा, छत्तीसगढ़। जहाँ एक ओर प्रदेश में हाल ही में जारी सोशल ऑडिट रिपोर्ट ने चौकाने वाला खुलासा किया है कि 9843 स्कूलों के कक्षा 3 के बच्चे न तो गिनती जानते हैं और न ही अक्षर ज्ञान, वहीं दूसरी ओर कवर्धा जिले की शिक्षिका विधि तिवारी, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला अगरीकला, जिला कबीरधाम, द्वारा विकसित नई ध्यान-पद्धति बच्चों की इस सीखने की कमी को दूर करने में एक आशाजनक समाधान बनकर उभर रही है।

राज्य के 38955 स्कूलों में हुए सर्वे में यह स्पष्ट सामने आया है कि बड़ी संख्या में बच्चे अभी भी बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान (FLN) से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की एकाग्रता की कमी, मानसिक असंतुलन और सीखने में रुचि की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। इसी पृष्ठभूमि में शिक्षिका द्वारा विकसित यह नई ध्यान-पद्धति अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है।

बच्चों के लिए नई ध्यान-पद्धति: भारतीय ज्ञान परंपरा + आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम

शिक्षिका विधि तिवारी ने पहली बार ध्यान, योग, विज़ुअलाइज़ेशन, ब्रेन डांस, ओम्-चैन्टिंग और भारतीय ज्ञान परंपरा की प्राचीन पद्धतियों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर एक नवीन विधि तैयार की है, जिससे बच्चे—

✔ खेल-खेल में ध्यान सीख रहे हैं
✔ तनावमुक्त होकर पढ़ाई कर रहे हैं
✔ गिनती, अक्षर ज्ञान और समझ की गति में सुधार ला रहे हैं

यह विधि बच्चों में एकाग्रता, स्मरण शक्ति, सीखने की गति और भावनात्मक संतुलन को तेज़ी से बढ़ा रही है—जो FLN सुधार के लिए सबसे आवश्यक है।

पुस्तक बनी बच्चों की पसंद—माँग बढ़ी कि यह सभी स्कूलों में उपलब्ध कराई जाए

इस पद्धति पर आधारित शिक्षिका की पुस्तक प्रकाशित होते ही बच्चों की पहली पसंद बन गई।
छात्रावासों में इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई है कि बच्चे स्वयं शासन से मांग कर रहे हैं कि यह पुस्तक सभी स्कूलों और छात्रावासों में उपलब्ध कराई जाए।

रिपोर्ट और नई पद्धति—दोनों ने दिखाया कि बदलाव की दिशा स्पष्ट है

जहाँ सोशल ऑडिट रिपोर्ट ने सीखने में गिरावट के गंभीर संकेत दिए, वहीं शिक्षिका की ध्यान-पद्धति ने यह साबित किया है कि यदि बच्चों के मन, मस्तिष्क और भावनात्मक स्तर पर काम किया जाए तो

✔ सीखने की क्षमता
✔ स्कूल उपस्थिति
✔ पढ़ने-लिखने की रुचि
✔ और व्यवहारिक बदलाव
तेज़ी से देखने को मिल सकते हैं।

शिक्षिका की मांग — नई पद्धति को पायलट प्रोजेक्ट बनाकर पूरे प्रदेश में लागू किया जाए

शिक्षिका ने राज्य शिक्षा विभाग एवं शिक्षा मंत्री से अनुरोध किया है कि—

 इस पद्धति को राज्य-स्तरीय पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाए।
 उन्हें जिला/राज्य स्तर पर शिक्षक प्रशिक्षण का अवसर दिया जाए।
 यदि SCERT तीन दिवसीय प्रशिक्षण का अवसर प्रदान करे, तो इसे राज्य का मॉडल प्रोजेक्ट बनाया जा सकता है।

कवर्धा मॉडल—छत्तीसगढ़ के लिए नई आशा

कवर्धा जिले के छात्रावासों में इस विधि को अपनाने के बाद

✔ बच्चों की एकाग्रता बढ़ी
✔ व्यवहारिक सुधार आया
✔ पढ़ने-लिखने की रुचि तेज़ हुई
✔ मानसिक तनाव और अवसाद में कमी आई

इन बदलावों ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि यह मॉडल पूरे प्रदेश में लागू होता है, तो आने वाले वर्षों में FLN स्तर पर ऐतिहासिक सुधार दर्ज किए जा सकते हैं।

शिक्षिका सुश्री तिवारी  ने जिला शिक्षा अधिकारी एफ. ए. आर. वर्मा एवं शिक्षा विभाग को हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि छात्रावास में कार्य करने एवं यह नई पद्धति लागू करने का अवसर प्रदान किया उसके लिए सहृदय धन्यवाद ज्ञापित करती हूं।

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