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पुलिस अधीक्षक ने ली अपराध समीक्षा बैठक, लंबित अपराधों की समीक्षा कर निराकरण के दिए निर्देश

सड़क हादसों पर कमी लाने पर विशेष फोकस, विजुअल और सामुदायिक पुलिसिंग पर जोर

रायगढ़, 19 जनवरी। आज दिनांक 19 जनवरी 2026 को पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल द्वारा पुलिस कंट्रोल रूम में सभी राजपत्रित पुलिस अधिकारियों, थाना प्रभारियों एवं शाखा प्रमुखों की अपराध समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में वरिष्ठ कार्यालय से प्राप्त दिशा-निर्देशों से अवगत कराते हुए पुलिस अधीक्षक ने वर्ष 2026 में जिले की पुलिसिंग को लेकर अपनी स्पष्ट कार्ययोजना प्रस्तुत की।
क्राइम मीटिंग में पुलिस अधीक्षक ने अपराधों की शीर्षवार समीक्षा करते हुए शरीर संबंधी अपराध, संपत्ति संबंधी अपराध, चाकूबाजी, महिला अपराध एवं साइबर अपराधों में गत वर्ष की तुलना में हुई बढ़ोतरी तथा उसके कारणों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने संपत्ति संबंधी अपराधों में कमी लाने के लिए मुखबिर तंत्र को मजबूत करने, थाना क्षेत्रों में बसे संदिग्ध व्यक्तियों की नियमित जांच तथा सख्त कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए।

महिला संबंधी अपराधों की गहन समीक्षा करते हुए पुलिस अधीक्षक ने इन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। सड़क दुर्घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया गया कि दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए हरसंभव प्रयासों से मृत्यु दर में कमी लाई जाए। समीक्षा में यह तथ्य सामने आया कि पूंजीपथरा, जूटमिल और खरसिया क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है, जबकि पुसौर, भूपदेवपुर और छाल थाना क्षेत्रों में दुर्घटनाओं में कमी दर्ज की गई है। इस पर जिला नोडल अधिकारी डीएसपी ट्रैफिक एवं संबंधित थाना प्रभारियों को बीते तीन वर्षों के IRad डाटा का विश्लेषण कर दुर्घटना जन्य स्थलों की पुनः रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

अनुविभागवार आर्म्स एक्ट, मादक पदार्थों, जुआ-सट्टा जैसी गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, नगर पुलिस अधीक्षक एवं एसडीओपी/डीएसपी को अलग-अलग नोडल अधिकारी नियुक्त कर जिम्मेदारियां सौंपी गईं। अपराधवार समीक्षा के बाद लंबित चालान, मर्ग प्रकरण एवं गंभीर मामलों की केस डायरी की एक-एक कर समीक्षा करते हुए राजपत्रित अधिकारियों और थाना प्रभारियों को शीघ्र निराकरण के स्पष्ट निर्देश दिए गए।

बैठक में उन्होंने विजुअल पुलिसिंग को और प्रभावी रूप से लागू किये जाने पर जोर देते हुए प्रमुख चौक-चौराहों, बाजार क्षेत्रों, संवेदनशील इलाकों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर पुलिस की सतत मौजूदगी रखने के निर्देश दिये और  सभी थाना क्षेत्रों में नियमित पैदल गश्त, मोबाइल पेट्रोलिंग और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिये गये हैं ।
उन्होंने बताया कि जिले में सामुदायिक पुलिसिंग जिसमें थाना क्षेत्रों में जनसंवाद कार्यक्रम, जागरूकता अभियानों के माध्यम से पुलिस सीधे जनता से जुड़कर उनकी समस्याएं सुन रही है और समाधान की दिशा में तत्परता दिखा रही है, इसे जारी रखा जाये।

महिला सुरक्षा, नशा मुक्ति, साइबर अपराध और सड़क सुरक्षा जैसे विषयों पर पुलिस द्वारा लगातार जागरूकता फैलाई जा रही है। आम नागरिकों की सहभागिता से अपराधों की सूचना समय पर मिल रही है, जिससे पुलिस की कार्रवाई अधिक प्रभावी हो रही है। सामुदायिक पुलिसिंग यह संदेश दे रही है कि सुरक्षित समाज के निर्माण में पुलिस और जनता की साझेदारी सबसे अहम है।
अपराध समीक्षा बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक  अनिल कुमार सोनी, नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा, एसडीओपी खरसिया प्रभात पटेल, एसडीओपी धरमजयगढ़  सिद्धांत तिवारी, उप पुलिस अधीक्षक यातायात उत्तम प्रताप सिंह, डीएसपी हेडक्वार्टर सुशांतो बनर्जी, वरिष्ठ स्टेनो  अशोक देवांगन सहित सभी थाना एवं चौकी प्रभारी तथा एसपी रीडर उपस्थित रहे।

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