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ट्री मेन ऑफ इंडिया :विष्णु लांबा पत्रकारों से हुए रूबरू

नक्सल ग्रीन मिशन पर साझा किया विचार

कोरबा। छत्तीसगढ़ की धरती एक बार फिर इतिहास रचने जा रही है, जहाँ संघर्ष की पहचान रखने वाले क्षेत्रों से अब संरक्षण और हरियाली का नया संदेश पूरे देश और दुनिया तक पहुँचेगा।
ट्री मैन ऑफ इंडिया के नाम से मशहूर पर्यावरण कार्यकर्ता विष्णु लाम्बा इन दिनों छत्तीसगढ़ दौरे पर हैं, जहाँ उनके नेतृत्व में “नक्सल ग्रीन मिशन” के माध्यम से एक अनूठी और परिवर्तनकारी पहल की जा रही है।

श्री लांबा ने प्रेस क्लब कोरबा के तिलक भवन में प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में कहा कि “नक्सल ग्रीन मिशन”श्री कल्पतरु संस्थान द्वारा संचालित यह अभियान “विनाश से विकास (Guns to Green)” की सोच पर आधारित पूर्व नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास उन्हें “वन मित्र”,“वन बंधु” और “तरु सखी” बनाकर पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि
एक राष्ट्रीय सामाजिक आंदोलन है, जो यह संदेश देता है कि “जहाँ कभी संघर्ष था, वहीं से संरक्षण की शुरुआत हो सकती है।”

कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य
पूर्व नक्सलियों का पुनर्वास और मुख्यधारा में समावेश ,उन्हें पर्यावरण संरक्षण का दूत बनाना,समाज में अहिंसा और सकारात्मक परिवर्तन का संदेश देना,जल, जंगल, जमीन और जैव विविधता की रक्षा में उनकी भूमिका सुनिश्चित करना।

मुख्य गतिविधियाँ
सामूहिक वृक्षारोपण अभियान
“एक व्यक्ति – एक वृक्ष – एक जिम्मेदारी”
“ग्रीन एंबेसडर” घोषणा,आत्मसमर्पित नक्सलियों का सम्मान, पर्यावरण चेतना कार्यक्रम

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
यह अभियान ऐसे समय में हो रहा है जब देश में नक्सल उन्मूलन की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। अमित शाह द्वारा 31 मार्च 2026 तक भारत को माओवाद मुक्त बनाने का लक्ष्य भी इस पहल को नई प्रेरणा देता है।

परिवर्तन की नई मिसाल
“नक्सल ग्रीन मिशन” देश और दुनिया के सामने यह उदाहरण प्रस्तुत करता है कि—
पूर्व नक्सली अब पर्यावरण रक्षक बनेंगे
जंगल संरक्षण में जमीनी भागीदारी बढ़ेगी
समाज को अहिंसा और सकारात्मक बदलाव का संदेश मिलेगा “बंदूक छोड़, वृक्ष अपनाओ” – यही इस मिशन का मूल मंत्र है।

ट्री मैन ऑफ इंडिया : राजस्थान के टोंक जिले के एक छोटे से गाँव से निकलकर विष्णु लाम्बा ने पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बना दिया।

उनकी प्रमुख उपलब्धियाँ:
31 वर्षों में 1 करोड़+ पौधारोपण और संरक्षण
लाखों पेड़ों को कटने से बचाया, “परिंडा अभियान” के माध्यम से पक्षियों के लिए जल व्यवस्था,इको-फ्रेंडली विवाह जैसे अभिनव प्रयोग देश के 22 राज्यों में पर्यावरण संदेश,
चम्बल के पूर्व दस्युओं और समाज के विभिन्न वर्गों को पर्यावरण से जोड़ना उनके कार्यों की सराहना अंतरराष्ट्रीय स्तर तक हुई है और उन्हें अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

निष्कर्ष
नक्सल ग्रीन मिशन” केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि परिवर्तन की एक राष्ट्रीय मिसाल है जहाँ संघर्ष से संरक्षण,और बंदूक से हरियाली की ओर एक नया इतिहास लिखा जा रहा है।

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